Vijaya Ekadashi 2026: 12 या 13 फरवरी, कब है विजया एकादशी? जानें सही तिथि से लेकर पूजन का शुभ मुहूर्त – vijaya ekadashi 2026 date 13 february vrat paran time puja vidhi mahatva bhagwan vishnu tvisg

Published On: April 27, 2026
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Vijaya Ekadashi 2026: साल 2026 में विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा. यह व्रत हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है. एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगा और इसका समापन 13 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार व्रत 13 फरवरी को ही रखा जाएगा. व्रत का पारण 14 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच किया जाएगा.

क्यों महत्वपूर्ण है विजया एकादशी?

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, विजया एकादशी यानी विजय दिलाने वाली एकादशी. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है. यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं से परेशान है या जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना कर रहा है, तो यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है.

शत्रुओं पर विजय के लिए क्या करें?

विजया एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. स्वास्थ्य ठीक हो तो केवल जल पर व्रत रखें. यदि स्वास्थ्य साथ न दे तो फलाहार के साथ व्रत कर सकते हैं.

दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है – ”ऊं नमो भगवते वासुदेवाय”, इस मंत्र का श्रद्धा से जाप करते हुए भगवान विष्णु से शत्रुओं पर विजय की प्रार्थना करें. अगले दिन पारण के समय स्नान-ध्यान के बाद भगवान को भोग लगाकर व्रत खोलें.

पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान राम लंका विजय के लिए समुद्र तट पर पहुंचे थे, तब बगदालभ मुनि ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी थी. कहा जाता है कि भगवान राम ने यह व्रत किया, जिसके प्रभाव से उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय प्राप्त करने में सफलता मिली.

विजया एकादशी व्रत की सरल पूजा विधि

सुबह स्नान करते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं और “हर हर गंगे” का उच्चारण करें. पीले वस्त्र धारण करें, यदि संभव न हो तो साफ सफेद वस्त्र पहनें. घर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर स्थापित करें. उन्हें पीले पुष्प अर्पित करें, तिलक लगाएं, अक्षत चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं. इसके बाद व्रत का संकल्प लें और अपने मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें. तुलसी की माला से 108 बार ”ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. दिनभर समय-समय पर मंत्र जप करते रहें. अगले दिन पारण के निर्धारित समय में भगवान को भोग लगाकर व्रत खोलें.

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